मुख्यमंत्री की पहल से पुनः जीवंत हुआ मल्हार महोत्सव*

**मल्हार महोत्सव का भव्य शुभारंभ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां***विधायक श्री धरमलाल कौशिक बतौर मुख्य अतिथि…

मुख्यमंत्री श्री अरुण साव खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स

*उपदेखने पहुंचे* *विजेताओं को दिए पदक, खिलाड़ियों से मिलकर हौसला अफजाई की*बिलासपुर. 26 मार्च 2026. उप…

छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का भव्य

*छत्तीसगढ़ में जनजातीय शक्ति का खेल महाकुंभ: देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का…

सादर प्रकाशनार्थ

*श्रेष्ठ गुणों की धारणा ही सच्चा धर्म- ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी* शिव अनुराग भवन में रामनवमी के…

बिलासपुर। छात्रसंघ चुनाव बहाली और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं को लेकर NSUI ने प्रदेशभर में…

कैट बिलासपुर प्रे.वि. क्र./05/03/2025-26

कैट बिलासपुर प्रे.वि. क्र./05/03/2025-26 दिनांक :-26-03-2026 “मार्च क्लोजिंग को देखते हुए CAIT की मांग – 31…

अवैध हॉस्टलों का जाल:

नियमों को ताक पर रखकर रिहायशी इलाकों में चल रहे सैंकड़ों पीजी और हॉस्टल​बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर…

छत्तीसगढ़ में 42 वर्षों से निकल रही रामनवमी शोभा यात्रा,

*इस वर्ष भी भव्य आयोजन की तैयारी*बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले 42 वर्षों से रामनवमी के पावन…

सांई झूलेलाल यज्ञ, बहराणा साहब की पूजा अर्चना के साथ हुए विभिन्न धार्मिक आयोजन बिलासपुर :-…

**प्रेस वि**ब्रह्माकुमारीज़, शिव- अनुराग भवन, बिलासपुर****दिनांक:*23/03/2026*विश्व जल दिवस पर मंजू दीदी बोलीं— प्रकृति पर अधिकार नहीं, संतुलन और सम्मान जरूरी**‘ज्ञान-जल’ से शीतल करें जीवन का ताप; रामायण श्रृंखला में जल संरक्षण का संदेश**बिलासपुर। राजकिशोर नगर स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के शिव-अनुराग भवन में आयोजित “रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन” श्रृंखला के चौथे दिन विश्व जल दिवस* के अवसर पर जल संरक्षण, स्वभाव की निर्मलता और आध्यात्मिक जीवन शैली पर विशेष संदेश दिया गया। मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने श्री राम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से जल के प्रति सम्मान और संतुलित उपयोग की प्रेरणा दी।उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, शांत और सार्थक बनाने का मार्गदर्शक है।*“रामायण हमें सिखाती है कि जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि देवतुल्य तत्व है—जिसका उपयोग श्रद्धा और जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए।”*मंजू दीदी ने गंगा पार करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि श्री राम द्वारा गंगा माता को प्रणाम करना जल के प्रति आदर का प्रतीक है। वहीं लंका जाने से पूर्व समुद्र से मार्ग प्राप्त करने के लिए तीन दिन तक की गई तपस्या यह दर्शाती है कि प्रकृति के साथ *संवाद और संतुलन* ही सही मार्ग है।*“प्रकृति पर अधिकार जमाने के बजाय उससे संवाद करना और संतुलन बनाए रखना ही सच्चा विकास है।”*राम सेतु निर्माण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास कार्य करते समय भी जल स्रोतों को नष्ट किए बिना आगे बढ़ना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरयू, गंगा और गोदावरी जैसी नदियों की पवित्रता का उल्लेख करते हुए जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने का आह्वान किया।उन्होंने वर्तमान जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानव शरीर का लगभग 70 प्रतिशत भाग जल है, फिर भी हम अनजाने में जल का दुरुपयोग करते हैं। छोटी-छोटी लापरवाहियाँ, जैसे नल खुला छोड़ देना, जल के प्रति हमारी असंवेदनशीलता को दर्शाती हैं।*“जल की एक-एक बूंद अमूल्य है; इसका अपव्यय नहीं, संरक्षण ही हमारा धर्म होना चाहिए।”**सीता माता और लव-कुश के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पेड़-पौधों के महत्व को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि वृक्ष न केवल जीवन देते हैं, बल्कि जल संरक्षण, वर्षा संतुलन और भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अतः प्रत्येक व्यक्ति को वृक्षारोपण का संकल्प लेना चाहिए।स्वभाव प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए दीदी ने कहा कि जिस प्रकार जल शीतल और निर्मल होता है, उसी प्रकार मनुष्य का स्वभाव भी मधुर होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे पानी में शक्कर मिलाने से वह सबको प्रिय लगता है, वैसे ही मधुर स्वभाव व्यक्ति को सबका प्रिय बना देता है।कार्यक्रम के अंत में सभी को संकल्प दिलाया गया कि वे जल को देवतुल्य मानते हुए उसका संरक्षण करेंगे, जल स्रोतों को स्वच्छ रखेंगे तथा प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राजयोग ध्यान एवं विश्व शांति की प्रार्थना के साथ हुआ।—**जारी कर्ता:**मीडिया प्रभागब्रह्माकुमारीज़, टिकरापारा, बिलासपुर