चिचिरदा की जनता का फूटा गुस्सा: ‘साहब! जब खसरा नं. 358 और 10 करोड़ हमारे थे, तो कॉलेज घुरु में

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चिचिरदा की जनता का फूटा गुस्सा: ‘साहब! जब खसरा नं. 358 और 10 करोड़ हमारे थे, तो कॉलेज घुरु में क्यों?'”चिचिरदा में स्वीकृत आत्मानंद कॉलेज को घुरु

स्थानांतरित करने पर भड़के ग्रामीण, सरपंच बोले— ‘प्रशासन ने बदला सीएम साय का फैसला, नहीं सुने तो जाएंगे कोर्ट’​तखतपुर/बिलासपुर:जिला बिलासपुर के तखतपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चिचिरदा में स्वीकृत स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम कॉलेज को जिला प्रशासन द्वारा अचानक ग्राम घुरु स्थानांतरित किए जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी

परियोजना में जिला प्रशासन द्वारा किए गए फेरबदल के खिलाफ चिचिरदा के सरपंच और ग्रामीणों ने ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।​मुख्य बिंदु: कागजों में चिचरदा, जमीन पर घुरु क्यों?​जमीन आवंटित: कॉलेज के लिए ग्राम चिचिरदा में खसरा नंबर 358 की 10 एकड़ प्राइम भूमि शासकीय रूप से आवंटित की जा चुकी है।​बजट स्वीकृत: शासन द्वारा इस कॉलेज भवन के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भी मंजूर की जा चुकी है।​

😂प्रशासनिक फेरबदल: ग्रामीणों का आरोप है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप तेजी से (साय-साय) स्वीकृत हुए इस कार्य को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ठंडे बस्ते में डालकर बिना किसी ठोस कारण के घुरु में बनाने का निर्णय ले लिया है।​सरपंच और ग्रामीणों की दोटूक चेतावनी​इस तानाशाही फैसले से आक्रोशित ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने बैठक कर जिला प्रशासन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।​”जब मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर चिचिरदा में 10 एकड़ जमीन और 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं, तो जिला प्रशासन किसके दबाव में इस शिलान्यास और निर्णय को बदल रहा है? हम इस नाइंसाफी के खिलाफ जल्द ही उच्च अधिकारियों से मिलेंगे। अगर हमारी बात नहीं सुनी गई, तो हम चुप नहीं बैठेंगे और सीधे माननीय न्यायालय (हाईकोर्ट) की शरण लेंगे।”— सरपंच एवं समस्त ग्रामीण, ग्राम चिचिरदा​क्षेत्र के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप​ग्रामीणों का कहना है कि चिचिरदा में कॉलेज बनने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों के गरीब और होनहार छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए भटकना नहीं पड़ता। जिला प्रशासन का यह फैसला विकास विरोधी है। यदि इस फेरबदल को तुरंत नहीं रोका गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन और कानूनी लड़ाई के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

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