पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ, बिलासपुर में व्यक्त की खुशीबिलासपुर। रायगढ़ कथक घराने के वरिष्ठ नर्तक, पद्मश्री सम्मानित लोककला साधक पंडित रामलाल बरेठ को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत संगीत नाटक अकादमी द्वारा अकादमी के सर्वोच्च सम्मान “संगीत नाटक अकादमी रत्न (फेलोशिप)” के लिए चयनित किए जाने पर शुक्रवार को बिलासपुर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस अवसर पर पंडित रामलाल बरेठ, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक तथा कथक गुरु भूपेंद्र बरेठ उपस्थित थे।प्रेस वार्ता में डॉ.

विनय कुमार पाठक ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ का परिचय देने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनका व्यक्तित्व और कृतित्व स्वयं उनका परिचय है। उन्हें पूर्व में पद्मश्री, शिखर सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है। अब संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह सर्वोच्च सम्मान उनकी

दशकों की कला साधना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।उन्होंने कहा कि कथक जगत के महान आचार्य पंडित बिरजू महाराज के बाद इस प्रतिष्ठित फेलोशिप सम्मान से सम्मानित होने वाले चुनिंदा कलाकारों में पंडित रामलाल बरेठ का नाम शामिल होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। यह सम्मान केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि रायगढ़ घराने, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा का सम्मान है।डॉ. पाठक ने रायगढ़ घराने की गौरवशाली परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था जब देश के कई संगीत समीक्षक रायगढ़ घराने को प्रमुख घरानों की श्रेणी में नहीं मानते थे, लेकिन स्वर्गीय पंडित कार्तिक राम और पंडित रामलाल बरेठ जैसे साधकों के अथक परिश्रम, प्रतिभा और समर्पण ने इसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। रायगढ़ घराने की सबसे बड़ी विशेषता शास्त्रीय कथक और लोकनाट्य परंपरा का अद्भुत समन्वय है।अपने संबोधन में पंडित रामलाल बरेठ ने संगीत नाटक अकादमी रत्न सम्मान के लिए चयनित किए जाने पर अकादमी के अध्यक्ष, ज्यूरी सदस्यों तथा सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और संतोष का विषय है। यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उनके गुरुओं, परिवार, रायगढ़ घराने और उन सभी कलाकारों का सम्मान है जिन्होंने उनकी कला यात्रा में योगदान दिया।पंडित बरेठ ने रायगढ़ घराने के इतिहास और अपनी कला यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें बचपन से ही संगीत और नृत्य का वातावरण मिला। उनके पिता स्वर्गीय पंडित कार्तिक राम रायगढ़ दरबार के प्रमुख नर्तकों में थे, जिन्होंने महाराजा चक्रधर सिंह के संरक्षण में कथक की शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने बताया कि रायगढ़ घराने में जयपुर घराने के तांडव पक्ष और लखनऊ घराने के भाव पक्ष का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है, जिसने इसे विशिष्ट पहचान दिलाई।उन्होंने कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह कला, संगीत और नृत्य के महान संरक्षक थे। उनके संरक्षण में देशभर के संगीतज्ञ, नर्तक, तबला एवं पखावज वादक रायगढ़ आते थे। महाराजा ने कथक की अनेक नई बंदिशों और रचनाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ संगीत एवं नृत्य पर महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना भी कराई, जो आज भी कला जगत की अमूल्य धरोहर हैं।पंडित बरेठ ने कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं बल्कि साधना का विषय है। कला के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए वर्षों की तपस्या, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि यदि युवा कलाकार समर्पण और मेहनत के साथ आगे बढ़ेंगे तो वे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना सकेंगे।पत्रकारों के एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कथक का क्षेत्र चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं की कमी नहीं है। उनका यह सम्मान नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा और युवा कलाकारों को यह विश्वास देगा कि कठोर परिश्रम और साधना से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किए जा सकते हैं।कथक गुरु भूपेंद्र बरेठ ने कहा कि पंडित रामलाल बरेठ का जीवन कला साधना, अनुशासन और समर्पण का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने नई पीढ़ी को कथक और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का जो कार्य किया है, वह आने वाले समय में भी कलाकारों को प्रेरित करता रहेगा।प्रेस वार्ता में उपस्थित पत्रकारों और कला प्रेमियों ने पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी रत्न सम्मान के लिए चयनित होने पर बधाई दी और इसे बिलासपुर, रायगढ़ तथा पूरे छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।कार्यक्रम में बिलासपुर प्रेस क्लब के पदाधिकारी, सदस्य तथा बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित थे।