नारी नव रूपों का स्वरुप है

Spread the love

ऐसी है जिसे हम कागज के पन्नों पर नहीं लिख सकते। एक महिला अपने जीवन में हर भूमिका को बहुत खूबसूरती से निभाती है। कभी लक्ष्मी का, कभी सरस्वती का, कभी दुर्गा का रूप धारण करती हैं। शादी के बाद महिला को लक्ष्मी कहा जाता है। जब उसके जीवन में आर्थिक संकट आता है, तो वह उस स्थिति में लक्ष्मी बन जाती है। जब उसके बच्चे पढ़ाई करते हैं, तो वह सरस्वती बन जाती है और उन्हें उच्च शिक्षा प्रदान करती है, उन्हें सक्षम बनाती है, इसलिए उसे सरस्वती कहा जाता है। घर में कोई भी संकट आने पर वह दुर्गा का रूप धारण करके घर की देखभाल करती है, इसीलिए उन्हें दुर्गा का स्वरूप कहा जाता है। वैसे भी, महिलाओं के कई रूप होते हैं।नारी नौ रूपों का स्वरुप है । रिया हरिकिशन गंगवानी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *