मौन, पवित्रता और समर्पण की प्रतिमूर्ति थीं राजयोगिनी दादी गुलज़ार – ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी

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प्रभु दर्शन भवन टिकरापारा में ब्रह्माकुमारी संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका दादी गुलज़ार जी का 5वां पुण्यस्मृति दिवस (दिव्यता दिवस) मनाया गया…

बिलासपुर, 13 मार्च।*
ब्रह्माकुमारीज़ संस्था की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी **दादी गुलज़ार ** का जीवन आध्यात्मिकता, समर्पण और पवित्रता का अद्भुत उदाहरण रहा। वे परमात्मा के दिव्य संदेशों की माध्यम आत्मा के रूप में जानी जाती थीं और अपने शांत व विनम्र व्यक्तित्व से हजारों लोगों को आध्यात्मिक प्रेरणा देती रहीं।

यह बातें ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी हृदय मोहिनी जी जिन्हें सभी दादी गुलजार जी कहते हैं, के पांचवें पुण्य स्मृतिदिवस पर प्रभु दर्शन भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
दीदी ने बतलाया कि जब दादी गुलज़ार जी आध्यात्मिक सभा में गद्दी पर विराजमान होती थीं, तब हजारों लोगों की उपस्थिति में भी गहन मौन और अनुशासन का वातावरण बन जाता था। उनके शांत और स्थिर व्यक्तित्व से लोगों को गहरी शांति और आत्मिक शक्ति का अनुभव होता था।

निर्माणता और आज्ञाकारिता उनके जीवन के प्रमुख गुण थे। उन्होंने सदैव स्वयं को एक साधारण सेवाधारी आत्मा मानकर सेवा की। उनकी एकाग्रता और स्मरण शक्ति इतनी विलक्षण थी कि वे ईश्वरीय संदेशों को बिना किसी लिखित सहारे के ज्यों का त्यों सुनाती थीं। दादी गुलज़ार जी का प्रेरणादायी जीवन मौन, पवित्रता और समर्पण के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।

उनके निमित्त परमात्मा को भोग स्वीकार कराया गया। सभी में श्रद्धांसुमन अर्पित कर भोग स्वीकार किया।

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