प्रेस वार्ता में उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहलाता है, इसलिए किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों से अनावश्यक वसूली बंद हो तथा भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

अजय पांडे ने बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्य है, फिर भी आम नागरिकों को महंगी बिजली और कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि प्रदेशवासियों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए तथा किसानों को समय पर बिजली दी जाए।

उन्होंने कहा कि स्थानांतरण नीति में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। पति-पत्नी को एक ही स्थान पर पदस्थ करने तथा कर्मचारियों की समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान करने की आवश्यकता है ताकि वे पूरी लगन से कार्य कर सकें।
प्रेस कांफ्रेंस में सड़क दुर्घटनाओं, फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपकरणों की कमी, कानून व्यवस्था, यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों को भी उठाया गया। उन्होंने कहा कि फैक्ट्रियों में सुरक्षा उपकरण अनिवार्य किए जाएं तथा अधिकारियों को अपने दायित्वों के प्रति जवाबदेह बनाया जाए।
अजय पांडे ने कहा कि समिति का नारा “जागते रहो, जागते रहो” है और संस्था समान अधिकार दिलाने के लिए गांधीवादी आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने पत्रकारों के हितों की भी बात करते हुए कहा कि पत्रकारों को उचित वेतन, बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी दोहराई।
अंत में उन्होंने कहा कि समिति लगातार देशभर में जनजागरण अभियान चलाकर आम नागरिकों को जागरूक करने का कार्य कर रही है तथा आगे भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।