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एक शाम संगीत के नाम आरोही म्यूजिकल ग्रुप के द्वारा आयोजित किया गया कार्यक्रम( कभी यादों में आऊ कभी ख्वाबों में आऊ तेरी पलकों की छांव में अपनी सारी जिंदगी गुजार दूं , राजेश छुगानी ) बिलासपुर :- विगत दिनों शहर के एक निजी होटल मैं आरोही म्यूजिकल ग्रुप के द्वारा एक शाम संगीत के नाम प्रोग्राम का आयोजन किया गया जो की

फैमिली कार्यक्रम था बड़ी संख्या में लोग फैमिली सहित शामिल हुए थे और संगीत के इस प्रोग्राम का आनंद लिया इसी अवसर पर समिति के सदस्य वरिष्ठ समाज सेवी सफल व्यवसायी पूज्य सिंधी सेंट्रल महा पंचायत के उपाध्यक्ष बिलासपुर निवासी भाई राजेश छुगानी जो कि इस समिति के सदस्य भी हैं अपनी मधुर आवाज में एक से बढ़कर एक पुराने नये गीत गाकर लोगों का मन मोह लिया हमर संगवारी से चर्चा करते हुए राजेश भाई ने बताया कि उन्हें संगीत में गाने का शोक बहुत पहले से था पर बिजनेस के कारण समय नहीं दे पा रहे थे विगत 10 वर्षों से वह समय निकालकर ऐसे प्रोग्राम में शामिल होते हैं और अपने दिल की आवाज से जो गीत निकलते हैं उन गीतों को गाते हैं और बाकी गीत जो संगीत के प्रेमी हैं उनकी फरमाइशों पर उनको सुनाते हैं उन्होंने बताया कि वह हर जगह ऐसे कार्यक्रम नहीं करते हैं पर जैसे हमारी संस्था है उनके बैनर तले जहां भी ऐसे कार्यक्रम होते हैं यां कुछ घर कैसे फंक्शन होते हैं समाज के कोई कार्यक्रम फंक्शन होंगे तो मौका मिलता है तब वह अपनी कला का प्रदर्शन जरूर करते हैं संगीत एक ऐसी चीज है वह दुश्मन को भी अपना बना देती है चाहे युवा हो या बुजुर्ग हो महिला हो या युवतीया हो संगीत के दीवाने सब होते हैं पर आज के गाने और पहले गानों में बहुत फर्क है आज के गाने बहुत कम लोगों को याद होंगे लेकिन पुराने गाने आज भी लोगों को याद रहते हैं और दिल को छू जाते हैं पहले का संगीत था तो वह जो संगीत देते थे और गाने लिखते थे वह दिल से लिखते थे और लोगों के नज को टोलकर कर और कहानी के माध्यम से ध्यान देते हुए लिखते थे पर आज बहुत कम ऐसे गीत होते हैं जो पॉपुलर होते हैं या लोगों को याद हो इसलिए वह पुराने गाने ज्यादा गाते हैं वह मधुर भी रहते हैं उनकी मिठास भी होती है और लोगों को सुनने में आनंद भी आता है जो दिल को छू जाए वही असली संगीत है दूसरे शहरों के माध्यम से हमारा शहर इस क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है क्योंकि यहां पर मंच नहीं है ऐसे थिएटर नहीं है ऐसे स्टूडियो नहीं है जहां पर लोगों को अपनी कला का अच्छी तरह प्रदर्शन करने का अवसर मिल सके शासन प्रशासन को चाहिए कि इस और भी ध्यान दें और ऐसे नए स्टूडियो का और ऑडोरियम का निर्माण करें जो आने वाली पीढियों को एक प्लेटफार्म प्रदान करें हम तो अपना शोक ऐसे कार्यक्रमों में आकर पूरा कर लेते हैं दिल को थोड़ा सुकून मिल जाता है और लोगों को आनंद आ जाता है पर जो हमारी पीढ़ी है उनको अगर राष्ट्रीय स्तर परफॉर्म करना है वह इसे अपना कैरियर बनाना है तो उनके लिए जरूरी है अच्छे स्टूडियो और अच्छे थिएटर बने और खासकर ऐसे प्रोग्राम भी होने चाहिए प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए संगीत के ऊपर कार्यक्रम होने चाहिए प्रतियोगिता होनी चाहिए ज्यादा से ज्यादा तभी हम दिल्ली मुंबई जाकर बड़े-बड़े शहरों में जो प्रतियोगिता होती हैं हमारे बच्चे वहां जाकर परफॉर्म करके आगे बढ़ सकते हैं आज के इस कार्यक्रम में कई गायको ने परफॉर्म किया और समिति के द्वारा सभी लोगों का छाल पहनकर स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया कार्यक्रम के आखिर में आए हुए सभी लोगों के लिए डिनर की व्यवस्था थी आज के इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग रहाइस सफल आयोजन के लिए वह सम्मान के लिए राजेश भाई को हमर संगवारी परिवार की ओर से भी बहुत-बहुत बधाइयां एवं शुभकामनाएं दी गई

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