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सच का 🪞आईनाव्यापार विहार पर नकली माल का दाग: छोटी 🐟 मछलियों पर कार्रवाई, 🐊मगरमच्छ कब…

बार फिर से कलाकृति एग्जीबिशन 15 और 16 मई को बिलासपुर में लगेगा( नई साझ सज्जा…

*निराश्रित बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के लिए आगे आई समाजिक संस्था सेवा एक नई पहल ,,,,,,,,,*…

*सिन्धी वुमन्स एन्टरप्रेनर कम्युनिटी स्वेक संस्था, सूरत द्वारा भारत की 100 सिन्धी बिजनेस वुमन्स का सम्मान…

पहले परमात्मा का शुकराना करो फिर दुकान जाओ, भाई साहब मनोहर सिंग

(सत्संग में आने का लाभ क्या हैमरने के बाद पता चल जाता है हर इंसान को…

पेट्रोल, तेल गैस की खपत कम करने का मोदी जी

* आह्वान को समूचे देशवासी स्वीकार करें**बृजमोहन अग्रवाल* *देश की जनता को मोदी जी पर पूरा…

सोना न खरीदने की अपील पर बोले कमल सोनी- ‘घबराएं नहीं व्यापारी, सराफा बाजार को सर्विस सेक्टर बनाने का है समय’

1 साल का संयम सालों साल की समृद्धि– कमल सोनी तिजोरी से निकलकर ‘ग्रोथ इंजन’ बनेगा…

15 मई को रिलीज होगी बहुप्रतीक्षित हिंदी फीचर फिल्म “भक्त मां कर्मा”बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की धरती पर…

पत्रकारिता पर बढ़ते दबाव और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवालछत्तीसगढ़ में एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा, स्वतंत्रता और सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गरियाबंद जिले के एक बुजुर्ग पत्रकार के साथ हुई कार्रवाई ने पूरे प्रदेश के पत्रकार जगत को झकझोर कर रख दिया है। जिस व्यक्ति ने वर्षों तक समाज की आवाज़ उठाई, जनसमस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश की जा रही है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है? क्या सच लिखना अब अपराध बन चुका है? क्या भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनविरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज़ उठाना गुंडागर्दी कहलाएगा?एक ओर वे लोग, जिन पर प्रदेश की शांति और छत्तीसगढ़ की माटी को खून से रंगने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा, सुविधाएँ और करोड़ों-अरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। दूसरी ओर, समाज के लिए कलम चलाने वाले पत्रकारों को मानसिक प्रताड़ना, झूठे मामलों और गिरफ्तारी जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है।गरियाबंद के इस बुजुर्ग पत्रकार की तस्वीर और परिस्थितियों को देखकर आम जनता भी यह सवाल पूछ रही है कि आखिर यह किस एंगल से समाज में दहशत फैलाने वाला “गुंडा” दिखाई देता है? यदि एक बुजुर्ग पत्रकार भी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा?पत्रकार समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता और व्यवस्था को उसकी वास्तविक तस्वीर दिखाता है। लेकिन जब उसी आईने को तोड़ने की कोशिश होने लगे, तब लोकतंत्र कमजोर होने लगता है।प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और सभी जिम्मेदार अधिकारियों से आग्रह है कि वे इस पूरे मामले को संवेदनशीलता से देखें। केवल बयान देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रदेश में पत्रकार बिना भय के काम कर सकें। यदि कलम डर गई, तो जनता की आवाज़ भी दब जाएगी।आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारों को संरक्षण मिले, उन्हें अपराधी की तरह ट्रीट न किया जाए। लोकतंत्र की मजबूती पत्रकारों की स्वतंत्रता से ही संभव है।“अगर सच लिखना अपराध है, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।”

बिलासपुर- अखिल भारतीय मानव अधिकार समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय पांडे ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि समिति पूरे देश में जनजागरण अभियान चला रही है। “सम्मानित जीवन, समान अधिकार” के नारे के साथ संस्था गरीबों, पीड़ितों, किसानों, मजदूरों एवं आम नागरिकों के अधिकारों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जेलों में भी समिति द्वारा सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं तथा जिन कैदियों की सजा पूरी हो चुकी होती है लेकिन जुर्माने की राशि जमा नहीं कर पाने के कारण वे बाहर नहीं आ पाते, उनकी सहायता भी समिति करती है।उन्होंने बताया कि समिति द्वारा 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ताकि समाज में अच्छे नागरिक तैयार किए जा सकें। अजय पांडे ने कहा कि उन्होंने जबलपुर में कैदियों के लिए श्रीमद्भागवत कथा आयोजन की अनुमति भी मांगी है।

प्रेस वार्ता में उन्होंने किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ धान…