डिजिटल व्यवस्था से सरल और पारदर्शी हुई भूमि

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डिजिटल व्यवस्था से सरल और पारदर्शी हुई भूमि रजिस्ट्रीरजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण की सुविधा, पटवारी-आरआई और तहसील कार्यालय के चक्कर से राहतबिलासपुर। भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में पंजीयन विभाग द्वारा डिजिटल व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। जिला पंजीयक आर.के. स्वर्णकार के

अनुसार आधुनिक डिजिटल प्रणाली के कारण अब भूमि रजिस्ट्री के साथ ही उससे जुड़े नामांतरण की प्रक्रिया भी पहले की अपेक्षा काफी आसान और त्वरित हो गई है।रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरणजिला पंजीयक आर.के. स्वर्णकार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि भूमि की रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण की प्रक्रिया भी पूरी हो जाती है। इससे क्रेता को जमीन खरीदने के बाद नामांतरण के लिए अलग से लंबी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता नहीं रहती।अब रजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिए पटवारी, आरआई अथवा तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो गई है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से रजिस्ट्री से संबंधित जानकारी सीधे आगे की राजस्व प्रक्रिया से जुड़ रही है।रजिस्ट्री और नामांतरण के दस्तावेज एक साथनई व्यवस्था में रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी होने के बाद रजिस्ट्री दस्तावेज और नामांतरण से संबंधित दस्तावेज एक साथ रजिस्ट्रीकर्ता को उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे भूमि खरीदने वाले व्यक्ति को अपनी संपत्ति के रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग कार्यालयों में दस्तावेज जमा कराने और प्रक्रिया पूरी कराने की आवश्यकता नहीं रहती।इससे आम नागरिकों को समय की बचत के साथ-साथ प्रक्रिया को समझने और पूरा करने में भी सुविधा मिल रही है।पटवारी और आरआई कार्यालय जाने की जरूरत कमपहले भूमि खरीदने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया के लिए संबंधित पटवारी, आरआई और तहसील कार्यालय में प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। डिजिटल व्यवस्था ने इस प्रक्रिया को काफी सरल कर दिया है।रजिस्ट्री से संबंधित रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट होने के कारण संबंधित राजस्व अधिकारी और पटवारी आवश्यक जानकारी सीधे पोर्टल के माध्यम से देख सकते हैं।भूमि विवादों के निपटारे में भी सुविधाडिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से भूमि से जुड़े मामलों में आवश्यक जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है। इससे किसी भी प्रकार के भूमि विवाद की स्थिति में संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन करना और मामले को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाना आसान हो गया है।भूमि विवाद होने की स्थिति में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के न्यायालय में सुनवाई का प्रावधान है। डिजिटल रिकॉर्ड व्यवस्था से ऐसे मामलों में आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने में भी सुविधा होती है।तत्काल रजिस्ट्री का सीधा लाभडिजिटल प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नागरिक को रजिस्ट्री कराने के बाद उसके परिणाम के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया जुड़ने से तत्काल रजिस्ट्री का वास्तविक लाभ क्रेता को मिल रहा है।रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया को एक-दूसरे से जोड़ने से भूमि रिकॉर्ड को अपडेट रखने में भी मदद मिल रही है।रिकॉर्ड ऑनलाइन, प्रक्रिया अधिक व्यवस्थितआर.के. स्वर्णकार के अनुसार रजिस्ट्री एवं नामांतरण से संबंधित रिकॉर्ड को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया जा रहा है। संबंधित पटवारी और राजस्व अधिकारी पोर्टल के माध्यम से रिकॉर्ड का अवलोकन कर सकते हैं।इस डिजिटल व्यवस्था से पुराने तरीके के रिकॉर्ड पर निर्भरता कम हुई है और भूमि से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।भूमि रजिस्ट्री से लेकर नामांतरण तक की प्रक्रिया को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ना आम नागरिकों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो रहा है। रजिस्ट्री के तुरंत बाद नामांतरण और दोनों प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेज एक साथ उपलब्ध होने से समय की बचत के साथ भूमि रिकॉर्ड को भी तेजी से अपडेट किया जा रहा है।

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